
दीपावली पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें
महाराष्ट्र सरकार ने संसदीय बैठक में जो प्रस्ताव पारित किया है उस प्रस्ताव के द्वारा महाराष्ट्र सरकार ने हमारी वर्षों से चली आ रही संस्कृति और सभ्यता को गाली दी है। उस प्रस्ताव में सीधा दिया गया है कि अगर कोई लड़का-लड़की कई वर्षों तक शादी से पहले साथ में रहते हैं तो उन्हें पती-पत्नि का दर्जा दिया जाएगा लेकिन हमारी सरकार यह क्यों भूल गई कि हमारे देष में चली आ रही सभ्यता और संस्कृति व बुजुर्गों द्वारा बनाए गए रीति-रीवाज को बदलने का हक किसी संस्था, संगठन व सरकार को नहीं है यह हमारी सभ्यता व संस्कृति के
खिलाफ है जिस पर केन्द्र सरकार को तुरंत कठोर कार्यवाही करनी चाहिए। आज वैसे ही हमारे देष में रेव पार्टियों के नाम पर लड़के-लड़की नंगापन कर रहे हैं, धार्मिक स्थल और पर्यटक स्थल पर भी यह नंगापन देखने को मिल रहा है जिस पर सरकार कोई कानून तो बना नहीं पा रही और बदले में एक नया प्रस्ताव जारी कर दिया कि लड़के-लड़की अगर बिना शादी कई वर्षों तक साथ में रहते हैं तो उन्हें समाज में पती-पत्नि का दर्जा दिया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार यह क्यों भूल जाती है कि उन्हें कोई हक नहीं कि हमारे देश में भारत की सभ्यता को खत्म कर बाहरी मुल्कों की सभ्यता को अपनाएं जहां पर बिना शादी के लड़के-लड़की साथ रहते हैं और कुछ वर्षों बाद लड़का लड़की को छोड़ किसी और लड़की के साथ रहने लगता है। ऐसे में क्या सही होगा कि लड़की को अगर लड़का छोड़ देता है तो उसे गुजारा भत्ता मिले और लड़की बोझ बनकर गुजारे भत्ते से पूर्ति करती रहे। क्या लड़कियां इसलिए ही होती है जब चाहा अपने साथ रखा और जब चाहा छोड़ किसी और को अपने साथ रखा। बल्कि बिना शादी के इस प्रकार रहने वाले लड़के-लड़कियों को तो कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए। बल्कि इस प्रस्ताव से तो उनको और आजादी मिल जाएगी, और वह भारत में विदेशों जैसा नंगा नाच करेंगे और हमारे देश संस्कृति और सभ्यता का यह एक मजाक होगा।
कालकर ही मानेंगे। लेकिन शिव सेना प्रमुख एक बात भूल गए कि महाराष्ट्र को तो वह उत्तर भारतियों से बचा लेंगे लेकिन देश को बचाने के लिए भी बाल ठाकरे साहब को शेर की भांति इन अल्प संख्यकों का शिकार करना होगा क्योंकि उत्तर भारतीय तो हमारे ही भाई हैं लेकिन देश में रह रहे देश के गद्दार यानि आतंकवादियों को पनाह देने वाले अल्पसंख्यक और हमारे ही गद्दार भाई। क्योंकि जब देखो दूसरी कौम के लोग हमारे हिन्दू संगठन पर प्रतिबंध की बात करते रहते हैं और अपने आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध की बात नहीं। अगर कोई आतंकी पकड़ा जाता है तो हमारे देश में बम ब्लास्ट कर जता देते हैं कि या तो हमारे साथियों को छोड़ो वरना हम भी नहीं छोड़ेंगे।इसलिए शिव सेना को बजरंग दल व विश्व हिन्दू परिषद को देश से गद्दार निकालने में साथ देना चाहिए न कि इस बात विरोध करना चाहिए कि महाराष्ट्र से उत्तर भारतियों को भगाया जाए। क्योंकि हमारे देश के गद्दार उत्तर भारतीय नहीं वो हैं जो आतंकवादियों को पनाह देकर हमारे देश को बर्बाद करते हैं।
दी किसी न किसी शक्ल में हमारे देश में घेरे हुए हैं, सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश भारत को अंग्रेजों व मुगलों ने मिलकर बर्वाद किया, आजादी के बाद अंडरवर्ल्ड फिर पाकिस्तान ने कश्मीर को भारत से छीनने की कई बार आतंकवाद के रूप में कोशिश की जो हर बार नाकाम रही, लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है अब भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (भाकपा या माओवादी) अब हमारे देश पर निगाह गढ़ाए हुए बैठी है कहीं जाकर थोड़ा सूकुन मिला तो नया मामला यह कि माओवादी नेता सब्ससाची पांडा उर्फ सुनील ने कहा कि कबूला की हमने ही लक्ष्मणानंद को मारा है और अब हमारे निशाने पर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवानी, विश्व हिन्दू परिषद नेता अशोक सिंहल व प्रवीण तोगड़िया हैं जो भड़काऊ भाषण देकर देकर देश में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। इसीलिए अब हम इन तीनों नेताओं को जान से मार देंगे। माओवादी नेताओं को एक बात समझना चाहिए कि अगर यह तीनों नेता भड़काऊ भाषण देते हैं तो आप क्या नया करते हैं आपने भी तो वही भड़काऊ बात बोली न कि तीनों कट्टर हिन्दु नेताओं को मार देंगे। अब लगता है कि माओवादी नेता देश के हित में न बोलकर आतंकियों के हित की बात कर रहे हैं। अब आतंकवादियों के साथ उनकी श्रेणी में आ रहे हैं माओवादी।
है लेकिन कोई प्रशाशन के काम में हस्तक्षेप करे तो फिर शांत नहीं बैठ सकती, चाहे गुंडागर्दी हो या नेतागिरी, क्योंकि पुलिस से बड़ा गुंडा न कोई था और न कोई है। इसका ताजा मामला गत दिवस सागर में नेता की पिटाई को लेकर है।सागर जिले के बीना क्षेत्र में जब रेलवे प्रशाशन ने अतिक्रमण हटाना चाहा तो उसी वक्त सागर से भाजपा सांसद वीरेन्द्र कुमार पहुंच गए और वहां जाकर रेलवे प्रशाशन के खिलाफ विरोध जताने लगे, लेकिन उनको क्या मालूम था कि प्रशाशन के खिलाफ विरोध जताना उनको इतना महंगा पड़ेगा कि वो
पुलिस की लठ के शिकार होकर अस्पताल में भर्ती हो जाएंगे। जब वह रेलवे पर हुए अतिक्रमण को लेकर प्रदर्षन कर रहे थे कि तभी भीड़ में किसी एक व्यक्ति ने उनके चांटा मार दिया फिर क्या था नेताजी के समर्थकों, भीड़ व पुलिस प्रशाशन में झड़प हो गई इस झड़प में पुलिस ने नेताजी को जमीन पर लिटाकर इतना मारा कि उन्हें तुरंत इलाज के भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। वही उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ डीजीपी ने जांच करने के निर्देष दिए हैं। लेकिन भारतीय पुलिस ने यह बता दिया कि हमसे बड़ा कोई भी गुंडा नहीं है हम चाहें तो उसे छोड़ दें या उसे इतना मारे कि वह अस्पताल में भर्ती हो जाए या मर जाए, उन्हें कोई मतलब नहीं। हम गुंडों बदमाशो से तो डरते हैं व नेताओं और आम जनता को परेषान कर बहुत बड़े शूरवीर बनते हैं जैसे कि मानो कोई तीर मार लिया हो। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर उचित कार्यवाही करना चाहिए और पुलिस प्रशाशन को आदेश दे कि वह जिस तरीके से नेताओं और आम आदमियों को परेशान करते हैं उन्हें परेशां करना छोड़ आतंकवादियों व गुंडे बदमाशो को पकड़ने में अपनी ऊर्जा खर्च करें जिससे कि भारतीय पुलिस का हमारे देश में नाम होगा। हमारे देश की जनता गुंडों से ज्यादा पुलिस से डरती है क्योंकि पुलिस उनके सब गुंडों से भी ज्यादा खराब व्यवहार करती है।
द मंडराने लगे थे लगने लगा था कि मानो अब हिन्दुस्तान से हिन्दुओं का नामो-निशान बिल्कुल ही खत्म कर दिया जाएगा। हमारी माताएं-बहनें घर से निकलने में कतराने लगी थीं कि घर से बाहर कदम रखने पर ऐसा न हो कि कहीं कोई मुगल शासन हमें उठाकर मुगलों के कदमों में न डाल दे। ओर तो ओर हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ा जा रहा था जिस जगह हमारा भगवान सुरक्षित नहीं था तो हमारी माता-बहनें कैसे सुरक्षित रहतीं, हिन्दु सिर्फ यही प्रार्थना करते कि हे भगवान क्या हमारी रक्षा के लिए कोई नहीं आएगा क्या हम इन मुगलों के शासनकाल में ऐसे ही जिएंगे। तब कहीं जाकर भगवान ने हिन्दुओं की सुनी और हमारे देश में एक बार फिर उन मां ने ऐसे सपूतों को जन्म दिया जिन्हें हम नहीं बल्कि समूचा भारत उन्हें वीर सावरकर और वीर शिवाजी के नाम से जानता है जिन्होंने न सिर्फ हिन्दुओं को एक नई पहचान दी बल्कि हिन्दुस्तान में मुगलों के पंजों से अपने प्या
रे वतन को छुड़ाने की भी आस जागी वहीं हिन्दू मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना भी करने लगे थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि अब भारत मां की रक्षा व मुगलों को मुंह तोड़ जबाव देने के लिए वो सपूत आगे आए हैं जिन पर आगे चलकर पूरी भारत को गर्व होगा, और हर मां यही सोचेगी काश मेरी कोक से भी वीर सावरकर व वीर शिवाजी जैसे सपूत जन्म लें और भारत मां की रक्षा के लिए शहीद हो जाएं।अगर सावरकर जी व शिवाजी जैसे हिन्दु रक्षक आगे नहीं आए होते तो हम हिन्दु आज भी किसी मुस्लमान के यहां उनकी जी-हजूरी कर रहे होते और हमारी माता-बहनें आज भी असुरक्षित होतीं।मैं यही कहना चाहूंगा भाई रजनीश के झा से कि
वह यह कहना बंद कर दें कि बजरंग दल हिन्दुओं का ठेकेदार नहीं बल्कि देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है क्योंकि इन्हीं के वजह से आज हम देश में आजाद घूमते नजर आ रहे हैं, और जैसा कि आपने कहा है कि बजरंग दल वाले तो जयचंद के वारिस हैं जिन्होंने गद्दी के लिए पृथ्वीराज चैहान को अपने फायदे के लिए बेच दिया तो भाई रजनीश के झा जी आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि पृथ्वीराज चैहान को हम एक वीर योद्धा के रूप में जानते हैं वही जयचंद को एक गद्दार के रूप में क्योंकि जयचंद ने अपने देश गद्दारी की थी।वहीं बजरंग दल देश के साथ गद्दारी नहीं बल्कि भारत मां की रक्षा व हिन्दुओं की रक्षा के लिए वह लड़ता है व अपना खून बहाकर भी देश की रक्षा करता है, ताकि उनके इस बलिदान को आगे आने वाली हिन्दू पीड़ियां याद रखें। तो भाई रजनीश कृपया आप बजरंग दल को आतंकी संगठन न कहकर एक देश भक्त संगठन कहें।इसी पर एक चर्चा हुई बजरंग दल के पूर्व जिला सहसंयोजक बालिस्ता रावत से जिस पर उन्होंने कहा कि हमारे देश में अगर आतंकवादियों से लड़ने व हिन्दुओं की रक्षा के लिए कोई सबसे बड़ी ताकत अगर है तो वो है विश्व हिन्दु परिषद व बजरंग दल ये गद्दार संगठन नहीं हो सकते बल्कि ये तो देश भक्त संगठन हैं वीर सावरकर व वीर शिवाजी की तरह इस पर बालिस्ता रावत ने इन शहीदों की याद में एक गीत लिखा है जिसकी कुछ पंक्तियां हैं:-
जरंग दल एक आतंकी संगठन है इस पर जल्द से जल्द प्रतिबंध लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि सावरकर व शिवाजी ने जब हिन्दुओं को एकत्रित किया था जब से ही मुस्लिमों व ईसाईयों को हिन्दु लोग अपना दुश्मन समझते हैं और हम पर और हमारे धर्म पर ऊंगली उठाते हैं। बजरंग दल को क्या हक है कि वह ईसाई समुदाय के चर्चों को जलाए। हम तो किसी भी समाज के व्यक्ति से नहीं कहते है कि वह अपना धर्म छोड़ हमारे ईसाई धर्म को अपनाए। अगर कोई खुद हिन्दू अपना धर्म छोड़कर हमारा धर्म अपनाना चाहते हैं तो हम क्यों मना करें। वहीं बजरंग दल का कहना है कि हम यह कतई बर्दाशत नहीं करेंगे कि हमारे हिन्दू समाज को कोई तोड़े जो हिन्दू समाज को तोड़ने की जुर्रत करेगा उसका यही हश्र होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या समाज का हो। वहीं बजरंग दल ने कहा कि दूसरे धर्म के लोग हमारे हिन्दू समाज के लोगों को कई प्रकार के प्रलोभन देते हैं और अपना हिन्दू धर्म छोड़कर अपने धर्म में सम्मिलित होने को कहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि हिन्दू समाज या संगठन कभी इस बात को बर्दाशत नहीं करेगा कि कोई भी दूसरा धर्म या समुदाय हमारे धर्म या समाज के टुकड़े कर हमको बोना साबित करे। हम तो किसी और समुदाय के व्यक्ति को नहीं जोड़ते। हम दूसरे समुदाय को अपने हिन्दू समुदाय के ऊपर हावी नहीं होने देंगे क्योंकि यह हिन्दुस्तान हिन्दुओं का है। अगर हम दूसरे समुदाय वालों से कहें कि तुम अपने बाप को बाप न बोलकर हमारे बाप को अपना बाप बोलो तो क्या तुम बोलोगे? जो हम अपने बाप को बाप न कहकर तुम्हारे बाप को बाप कहें। अगर आज हिन्दुस्तान में विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे हिन्दू संगठन नहीं होते तो हम हिन्दुओं का नामो-निशान यह दूसरे समुदाय के लोग काफी पहले ही मिटा चुके होते या अपना गुलाम बना होते, लेकिन भला हो इन हिन्दू संगठनों का जो हमारे इस बहुसंख्यक समाज को आज भी जोड़े रखें हैं।

ठाकरे मराठी भाषा की वकालात करते थे और उत्तर भारतीयों का अपमान अब कहां गया? मराठियों का सम्मान करने वाली मनसे पार्टी के एक कार्यकर्ता ने कोर्ट के बाहर हिन्दी भाषा में बोर्ड लगाया और मराठी छोड़ हिन्दी को अपनाया। जिसमें दिखाया गया है कि आतंकवाद के खिलाफ मनसे प्रमुख राज वकीलों से कह रहे हैं कि हमें गर्व है कि हम इस देष के नागरिक हैं और हमें आतंकवाद के खिलाफ एक जुट होकर लड़ना चाहिए, तो राज ठाकरे जी क्या आपकी पार्टी एक आतंकवादी पार्टी से कम है? जो खुलेआम मुंबई में उत्तर भारतीयों पर अपना मोर्चा खोले हुए है। क्या आप नहीं मानते कि आपके इस रवैये से लोगों का मुंबई शहर में घूमना मुष्किल हो गया है? उत्तर भारतीय
शहर में घूमने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं हमें मनसे कार्यकर्ताओं की मार न खाना पड़े। इस पर यही कहूंगा कि मराठी व गैर मराठी के मसले को भूल आप यह क्यों नहीं सोचते कि हम सब इस प्यारे भारत देष के नागरिक हैं जहां पर सभी भाषा-भाषियों व समाज के लोगों का अधिकार है। अगर आप भी यही सोचें कि महाराष्ट्र पर सिर्फ मराठों का ही अधिकार नहीं बल्कि समूचे देषवासियों का अधिकार है तो फिर देखिए यह आतंकवाद एक चुटकी में खत्म हो जाएगा। आतंकवादी संगठन या आतंकवादी भारत की तरफ निगाह उठाने की जुर्रत तक नहीं करेगा। आतंकवाद ने अगर भारत पर आंख उठाई तो समूचे भारतीय लोग आतंकवादियों का वही हश्र करेंगे जो आजादी के समय अंग्रेजों का हुआ था, क्योंकि भारत एक परिवार है और इसमें रहने वाला हर नागरिक इस परिवार का सदस्य है। झगड़े तो हर घर में होते हैं लेकिन झगड़कर आपस में लड़ते नहीं, बल्कि एक जुट होकर ही रहते है। अगर हम भाषावाद या जातिवाद के विवादों को भूल जाएं और सिर्फ यही याद रखें कि हम सब पहले हिन्दुस्तानी हैं, और कोई नहीं। तो फिर देखो पाकिस्तान भी हमसे आंख मिलाने में कतराएगा।
क होती है तब उसे देखने लड़के वाले आते हैं तो लड़की को देख पसंद आने पर लड़के के माता-पिता शादी के लिए हां करते हैं और लड़की के माता-पिता को यह दिलासा देते हैं कि हमें सिर्फ लड़की चाहिए दहेज नहीं क्योंकि हम दहेज नहीं मांगते और हमारे घर में बहू को बहू नहीं बल्कि बेटी की तरह लाड़-प्यार से रखते हैं। यह बात सुन लड़की के माता-पिता की खुषी का ठिकाना ही नहीं रहता इसी बीच लड़के वाले बोलते हैं कि हमें तो दहेज में कुछ नहीं चाहिए बस बारातियों के स्वागत में कोई कसर नहीं रहना चाहिए। इस पर लड़की के माता-पिता कहते हैं कि बारातियों के स्वागत में कोई कसर नहीं रहेगी जिससे आपको कोई षिकायत का मौका मिले। तो तुरंत ही लड़के वाले अपना एक और दांव फैकते हैं कि वैसे तो हमें दहेज में कुछ नहीं चाहिए लेकिन आप अपनी बेटी को तो खाली हाथ विदा नहीं करेंगे आप हमें गलत मत समझिए वैसे तो आप इतने समझदार
हैं ही हमारे कहने का क्या मतलब है।ससुराल में जब बेटी जाए तो सास-ससुर के रूप में माता-पिता मिले और ननद व देवर के रूप में बहन व भाई। लेकिन जब लड़की ससुराल पहुंचती है तो उसका बड़ा आदर सत्कार होता है और बहू उन्हें लक्ष्मी दिखती है, जैसे ही बहू की शादी को 15 दिन या महिना भर होता है ससुराल वाले अपना रंग दिखाना चालू कर देते हैं उसे लक्ष्मी की बजाए मनहूस दिखती है जब ससुराल वाले देखते हैं कि हमारा समधियों ने तो दहेज के नाम पर कुछ भी नहीं दिया सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी को खाली हाथ पहुंचा दिया फिर वह दहेज मांगने के लिए कोई न कोई बहाना बनाते हैं और दहेज न मिलने पर उसे या तो घर से धक्के मार कर घर से निकाल देते हैं या फिर बेटी जैसी लगने वाली बहू को इतना परेषान किया जाता है कि उसके मां-बाप को अपनी बेटी की इस हालत पर तरस आए और कम से कम बेटी की यह हालत न हो दहेज तो दे ही देंगे। दहेज मिला तो ठीक नहीं तो बहू को ससुराल वाले एक नौकरानी की तरह बर्ताव कर बात-बात में उसे उसके मां-बाप के बारे में जली-कटी सुनाते हैं और कहते हैैं कि भिखारी कहीं के कहां तो कहते थे कि आपको हमारी तरफ से कोई षिकायत का मोका नहीं मिलेगा, षिकायत तो दूर हमें तो उल्टा उनकी बेटी को पालना पड़ रहा है। हरामखोर, मनहूस कुतिया मर क्यों नहीं जाती जैसे अभद्र शब्द का इस्तेमाल करने लगते हैं।ससुराल वालों को जैसे ही मौका मिलता है वह लक्ष्मी जैसी लगने वाली बहू को मारना, पीटना भी चाहू कर देते हैं सारा काम कराने के बाद भील अगर कोई गलती हो जाए तो उसे भूखे रहने की सजा देते हैं और ताने मारते हैं कि तेरे मां-बाप के यहां यही सीख कर आई है तू। हे भगवान इस लड़की ने तो हमारे खानदान की नाक कटा दी। और अंत में बहू को बेटी का दर्जा देने वाले उसी बहू को तेल डालकर जिंदा जला देते हैं। लेकिन वही ससुराल वाले यह भूल जाते हैं कि वो अगर किसी और की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला रहे हैं और कल कोई उनकी बेटी के साथ यही करे तो कहते हैं कि दहेज के लिए हमारी बेटी को जिंदा जला डाला।बंधन सात जन्मों का के धारावाहिक में दिखाने वाली घटना कोई कालपनिक घटना नहीं बल्कि हमारे देष के ज्यादातर राज्य के छोटे-बड़े शहरों में होने वाली यह आम घटना है।कहने को सरकार कहती है कि यह पहले वाला वक्त नहीं जहां महिलाओं को सिर्फ चूल्हा-चैका के अलावा कोई औरे काम करने की इजाजत नहीं थी आज के वक्त में हर क्षेत्र में पुरूष जितना आगे हैं उनसे कहीं आगे महिलाएं भी अपना नाम रोषन कर रहीं हैं। आज लड़के-लड़की में कोई फर्क शेष नहीं है। लेकिनप आज भी दहेज के लिए लड़कियों को ही क्यों जलाया जा रहा है। इस दहेज की आग से इन लड़कियों को बचाने के लिए सरकार को कोई सख्त कानून बनाने के साथ-साथ कठोर कदम भी उठाने चाहिए। जिससे की किसी भी मां-बाप के कलेजे के टुकड़े को कोई उनके सामने जला के न मार सके।
हुए खुलासे में यह बात सामने आई है कि भारत में कट्टर हिन्दू संगठन के रूप में काम कर रहे बजरंग दल भी बम बनाने लगा है और इससे आतंकवादी संगठन सिमी, इंडीयन मुजाहिद्दीन (ईएम) की तरह ही यह भी आतंकवादी संगठन बनने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।बजरंग दल के इस रवैये पर विष्व हिन्दू परिषद और भारतीय जनता पार्टी भी बिल्कुल मौन हैं इस पर कार्यवाही नहीं कर रही हैं।उड़ीसा व कर्नाटक में हुए चर्चों पर हमले में धर्म के नाम पर बजरंग दल ने साम्प्रदायिक हमले किए हैं जो कि हिन्दू के नाम की दुहाई देने वाले बजरंग भी तो एक आतंकवादी संगठन के रूप में काम कर रहा है अगर बजरंग दल एक धार्मिक व हिन्दुत्ववादी संगठन है
तो सिमी भी कोई आतंकवादी संगठन नहीं है। अगर सिमी पर प्रतिबंध जरूरी है तो बजरंग दल पर भी प्रतिबंध जरूरी है।कर्नाटक में हुए हमले की निंदा करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मो. शफी कुरैषी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने को कहा क्योंकि हमारे देष को बजरंग दल से बहुत बड़ा खतरा है।वहीं उत्तर प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी केन्द्र सरकार से बात कर कहा है कि बजरंग दल पर जितनी जल्दी हो सके प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि बजरंग दल हिन्दुत्तव के नाम पर साम्प्रदायिक दंगे करवा रहा है जिससे हमारे देष के नागरिकों को खतरा है क्योंकि बजरंग दल भी बम बनाने लगा है।वहीं बेंगलूरू में इन दोनों के समर्थन में श्रीश्री रविषंकर जी महाराज ने हिंसा पर खेद जताते हुए कहा कि हर जगह धर्म के नाम पर साम्प्रदायिक दंगे कराना हिन्दू धर्म के खिलाफ है। उन्होंने केन्द्रीय जांच कमेटी को गठित कर जांच करने के लिए कहा है।बजरंग दल को आज हिन्दुस्तान में अपनी पहचान बनाने में कोई ज्यादा समय नहीं लगा है इसकी स्थापना उत्तर प्रदेष में विष्व हिन्दू परिषद ने एक युवा शाखा के रूप में की थी जिसे 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वस में ज्यादा पहचान मिली। तब बजरंग दल ने अपनी कई नई शाखाओं की स्थापना की जिसमें प्रमुख हैं दुर्गा वाहिनी, गौरक्षा समिति।भास्कर के डीबी स्टार में बताया गया है कि बजरंग दल ने कई जगह बम बनाए जिसमें उनके नेताओं व कार्यकर्ताओं की जान गई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा था कि आतंकवाद से निपटने के पोटा तो नहीं बल्कि पोटा से भी ज्यादा सख्त कानून बनाया जाएगा और उसका डिपार्टमेंट भी अलग होगा लेकिन जुमा-जुमा 4 दिन हुए प्रधानमंत्री के इस बयान को आज गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि कोई नए कानून की आवश्यकता नहीं बल्कि यही कानून सही है सिर्फ कुछ मशीनरी की आवश्यकता है क्योंकि महाराष्ट्र में तो मकोका कानून है फिर भी वहां पर बम
ब्लास्ट नहीं हुए क्या इसलिए नए कानून से कुछ नहीं होता कानून जो है वही सही है। अब एक बात समझ से परे है कि शिवराज पाटिल जी नए कानून के खिलाफ क्यों हैं क्या वह नहीं चाहते कि देष में अमन शांति बनी रहे, या फिर शिवराज पाटिल जी इसलिए इस नए कानून के खिलाफ हैं क्योंकि उनको डर है कहीं उनके हाथों में एक नए मंत्रालय की बागडोर न दी जाकर किसी और को इस मंत्रालय का मंत्री बनाया जाए जो बाकई इस मंत्रालय के साथ-साथ देश का भला कर सके आतंकवादियों को साफ करके, इससे कहीं यह साबित न हो जाए कि माननीय पाटिल साहब के हाथ में जो गृह मंत्रालय है उसकी हालत काफी लचर है। अगर ऐसा नहीं है तो उन्हें फिर किस बात की चिंता उन्हें तो बल्कि खुश होना चाहिए कि हमारे नए देश में आतंकवादियों से निपटने के लिए एक नया व सख्त कानून बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की है। कहीं ऐसा तो नहीं शिवराज पाटिल जी कहीं ये बताना चाह रहे हों कि वह देश व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी दोनों से ऊपर हैं।
करके ही दम लेता है उसी प्रकार आतंकवाद दीमक की तरह हमारे भारत देष से चिपक गया है जो लगता है कि पूरी तरह खत्म करके ही दम लेगा क्योंकि दिल्ली में हुए आतंकवादी हमलों में दिल्ली पुलिस ने जो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जो छापामारी की तो पता चला कि इन आतंकवादियों के दोनों फाइनेंसर पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं और इन्हीं को लेकर दिल्ली व उप्र पुलिस सहित पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वो जितना सोच रहे थे ये सब कुछ उस सबसे बढ़ कर है। दिल्ली में बम धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के आति
फ का जब ईमेल चेक किया गया तो एक और खुलासा सामने आया जिसमें लिखा था कि देष में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए गौरी व गजनबी नामक आतंकी संगठन जिसमें करीब 20-30 कार्यकर्ता शामिल होंगे वो मौके की तलाष में हैं। दैनिक भास्कर में छपी ख़बर गुजरात के वड़ोदरा में हुए हमले में छापे की कार्यवाही को अंजाम देते वक्त विस्फोटक सामान के साथ क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को एक भड़काऊ सीडी बरामद हुई और क्राइम ब्रांच के अनुसार यह सीडी उस्मान अगरबत्तीवाला नामक आरोपी के ठिकाने से वरामद हुई जिसको देखने के बाद तो मानो पुलिस के पांव के नीचे से जमीन ही खिसक गई हो, उस सीडी में कुछ और नहीं भड़काऊ भाषण व आतंकवादी गतिविधियां शामिल थीं कि अगर कोई भी इसका विरोध करता है तो मौत के घाट उतार दिया जाएगा। ये किसी और ने नहीं बल्कि अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन, अयमान अल जवाहिरी और तालिबानी नेता मुल्ला उमर के भड़काऊ भाषण व आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने की बात थी। जिसमें साफ-साफ लिखा है कि अल्लाह को न मानने वाला और जो मुसलमान हमारे काम में अड़चने पैदा करेगें उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा, और कोई भी हिन्दू या मुसलमान अगर विरोध करता है तो उसका सर कलम कर दिया जाएगा। जो मुसलमान कहते हैं कि कोई भी आतंकी हिंसा होती है और सबसे पहले शक की बुनियाद पर हम मुसलमानों को गिरफ्तार किया जाता है तो क्या करें जितने भी आतंकी संगठन हैं वह सब भी तो मुस्लिम आतंकी संगठनों से तालमेल रखते हैं और कहते हैं कि अल्लाह को न मानने वालों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। इन आतंकी हमलों से पाकिस्तान तो बहुत खुश होगा क्योंकि यही पाकिस्तान तो है जो दुनिया भर के आतंकियों को पनाह देता है और भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाकर उसकी पीठ में छुरा भौंकता हैं और कहता यही है कि हमें बहुत खेद है कि भारत पर आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान के जो मंसूबे हैं कि मैं भारत पर बार-बार आतंकी हमला करवाकर किसी तरह से कष्मीर को ले लूंगा तो पाक यह भूल जाए कि कष्मीर तो मिलने नहीं देंगे। भारत-पाक की जब कभी भी शांति वार्ता के लिए पहल की जाती है तो शांति वार्ता में आतंकियों को छोड़ पहले कश्मीर मुद्दा उठ जाता है। यह तो वही बात हुई मखमल में लपेटकर जूते से मार लिया, अगर किसी ने कहा कि मार क्यों रहे हो तो कह दिया कि मारा कहां से साफ किया है।