उड़ीसा में बजरंग दल ने धर्म परिवर्तन को लेकर चर्च में आग लगा दी और बजरंग दल के एक नेता को गिरफ्तार कर लिया गया। अपने धर्मों को बचाने के लिए कौन सा समाज या कौन सी कौम कुछ नहीं करती अगर बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने आग लगा दी तो पूरे देष में इसाई धर्म के लोगों ने इतना बवाल मचा रखा है। अगर कोई हिन्दू किसी इकाई या अन्य किसी कौम के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराए तो सभी दूसरे समाज चुप रह जाएंगे क्या जो हिन्दू समाज चुप रह जाए। भारत देष में हिन्दुओं पर ही सारी आपत्ति क्यों हैं क्या हिन्दू इस देष का नहीं है क्या। अगर जबरदस्ती हिन्दू धर्मपरिवर्तन पर सरकार अगर चुप बैठी रहेगी तो कोई तो हिन्दू संगठन कुछ करेगा या वह भी नपंुसक की तरह चुप रहेंगे। आज का हिन्दू पहले वाला हिन्दू नहीं है जोकि कोई भी आए दो-चार लगाए और चला जाए। अगर हिन्दू धर्म का लड़का किसी दूसरे धर्म की लड़कियों से अगर षादी करता है तो उसे अपना धर्म बदलना पड़ता है क्योंकि पूरा समाज उसका विरोध करता है, वहीं अगर दूसरे धर्मों की लड़कियां अगर हिन्दू धर्म के लड़कों से षादी करती हैं तो भी उन्हें ही धर्म क्यों बदलना पड़ता है। वहीं दूसरी और हमारे देष में आतंकवाद तो सबसे बड़ा और गंभीर मामला है जिसे हमारी सरकार न तो पूरे तरह से साफ करना चाहती है और न ही हमारे देष की सेना या पुलिस को करने का हुक्म देती है। सरकार को तो सिर्फ अपना और अपने मंत्रियों का ही दिखता है चाहे देष में क्यों न आग लग जाए। इसका ताजा मामला हाल ही में देखने को मिला है जहां हमारे desh की राजधानी कहे जाने वाले षहर दिल्ली में आतंकवादी आतंक मचा रहे थे वहीं हमारे देष के गृहमंत्री sivaraaj पाटिल अपने कपड़े बदलने में लगे थे और जब पर घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने वही पुराना घिसा-पीटा भाषण कि हम इस हमले की निंदा करते हैं तथा मरने वालों को सरकार की तरफ कुछ लाख रूपया मुआवजा देने की भी घोषणा करते हैं तथा आतंकवादियों को जल्द से जल्द हिरासत में लेकर कठोर कार्यवाही की जाएगी। हमारे देष के नेता यह क्यों भूल जाते हैं कि जो लोग आतंकवादी हमले में मारे गए हैं वह भी किसी के बेटा, पिता, पति थे। नेताओं को किसी के जीने मरने से कोई मतलब नहीं उन्हें तो सिर्फ एक दूसरे पर कीचड़ उछालना और राजनीतिक रोटियां सेकना ही आता है क्योंकि हमारे देष के नेता जानते हैं कि हम तो चारों तरफ से सिक्योरिटी गार्ड से घिरे हुए हैं कोई हमारा क्या बिगाड़ सकता है हम घटनास्थल पर पहुंचे तो हमको हाइलाइट करने के लिए मीडिया उससे पहले पहुंच जाए क्योंकि जब हम मुआवजे की घोषणा करें तो हमारा इलेक्ट्राॅनिक मीडिया व प्रिंट मीडिया में नाम हो कि नेताजी वहां पहुंचे तो उन्होंने मुआवजे की इतनी रकम देने की घोषणा की और आतंकवादियों पर कुछ वही चुनिंदा shabd कहे और चलते बने। क्योंकि हमारे नेता जानते हैं कि हमें तो अगर छींक भी आ जाए तो पूरा का पूरा मंत्रिमंडल और मीडिया हिल जाए कि नेताजी को छींक आई है और अगले ही दिन सभी पेपर के फ्रंट पेज पर नेताजी की खबर देखने की मिलती है। गरीब जनता मरी है वो तो होती ही इसलिए है कि मरे और हमें राजनीतिक रोटियां सेकने को मिले क्योंकि चुनाव भी तो नजदीक ही हैं।
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