Wednesday, September 24, 2008

सख्त कानून पर दो राय

  • हृदेश अग्रवाल
अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा था कि आतंकवाद से निपटने के पोटा तो नहीं बल्कि पोटा से भी ज्यादा सख्त कानून बनाया जाएगा और उसका डिपार्टमेंट भी अलग होगा लेकिन जुमा-जुमा 4 दिन हुए प्रधानमंत्री के इस बयान को आज गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि कोई नए कानून की आवश्यकता नहीं बल्कि यही कानून सही है सिर्फ कुछ मशीनरी की आवश्यकता है क्योंकि महाराष्ट्र में तो मकोका कानून है फिर भी वहां पर बम ब्लास्ट नहीं हुए क्या इसलिए नए कानून से कुछ नहीं होता कानून जो है वही सही है। अब एक बात समझ से परे है कि शिवराज पाटिल जी नए कानून के खिलाफ क्यों हैं क्या वह नहीं चाहते कि देष में अमन शांति बनी रहे, या फिर शिवराज पाटिल जी इसलिए इस नए कानून के खिलाफ हैं क्योंकि उनको डर है कहीं उनके हाथों में एक नए मंत्रालय की बागडोर न दी जाकर किसी और को इस मंत्रालय का मंत्री बनाया जाए जो बाकई इस मंत्रालय के साथ-साथ देश का भला कर सके आतंकवादियों को साफ करके, इससे कहीं यह साबित न हो जाए कि माननीय पाटिल साहब के हाथ में जो गृह मंत्रालय है उसकी हालत काफी लचर है। अगर ऐसा नहीं है तो उन्हें फिर किस बात की चिंता उन्हें तो बल्कि खुश होना चाहिए कि हमारे नए देश में आतंकवादियों से निपटने के लिए एक नया व सख्त कानून बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की है। कहीं ऐसा तो नहीं शिवराज पाटिल जी कहीं ये बताना चाह रहे हों कि वह देश व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी दोनों से ऊपर हैं।

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