Tuesday, October 7, 2008

समाज को लेकर आपस में लड़ाई

हृदेश अग्रवाल
रणधीर जी आप आतंकवादी और बजरंग दल वाले मुद्दे को कृपया कर स्वर्ग लोक व भूलोक से न जोड़े तो ही अच्छा होगा क्योंकि स्वर्ग लोक में जाने लायक आपकी और हमारी औकात नहीं है, क्योंकि हम लोग इतने पापी हैं कि हमें तो सिर्फ और सिर्फ नरक की आग में झुलसना पड़ेगा और रही दूसरी बात कि जेल में कोई भी बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद या आरएसएस वाला नहीं है जो भी हैं इस्लामी आतंकी संगठन वाले ही हैं तो आपको एक बात यह बता दूं कि जो जैसा करेगा वो वैसा ही भरेगा मतलब जो भारत की छाती पर पैर रखकर उसका सीना छलनी करेगा तो कोई भी हिन्दू संगठन चाहे वो आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल या षिव सेना कोई भी बर्दाशत नहीं करेगा। आपने लिखा है कि आखिर में मरता एक हिन्दुस्तानी ही है चाहे वह किसी भी कौम का हो? तो यह बता दें कि पहले किसी हिन्दू संगठन ने हमले नहीं किए, हमले तो पहले इस्लामिक संगठन ने ही किए हैं चाहे अक्षरधाम मंदिर हो या फिर भारत की गरिमा समझी जाने वाली संसद हो हर जगह इन इस्लामिक संगठन वालों ने हम हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। जिसे कभी भी माफ नहीं किया जाएगा। अपाने लिखा है कि हम सर्वधर्म संभव की बात करने वाले ही लोगों की बहु-बेटियों के साथ बलात्कार कर रहे है, तो मैं आपसे सहमत नहीं हूं क्योंकि माना आज बलात्कार हमारे देष की एक बहुत बड़ी समस्या है लेकिन सभी बलात्कार कोई हिन्दू ही नहीं करता। हम हिन्दुओं की बेटियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनके शादी करने की बात कहकर उनका बलात्कार करने वाले क्या यह इस्लालिम लोग नहीं है। अगर हमारी बेटी ने इन लोगों से शादी की तो भी वह इस्लाम को अपनाए, अगर इनकी बेटी ने किसी हिन्दू से शादी की तो भी वह लड़का इस्लाम अपनाए। ऐसा तो कहीं नहीं होता कि शादी के बाद किसी लड़के ने लड़की के धर्म को अपनाया हो। जहां तक मैं जानता हूं तो हिन्दुओं की लड़कियों से शादी करने की प्रथा तो अकबर के जमाने से चली आ रही है, और अपनी बेटियों को हिन्दू में न देने की भी प्रथा। क्योंकि यह लोग हमारी बेटियों को लेकर अपना समाज बढ़ाना चाह रहे हैं जिससे की हिन्दू बहुसंख्यक की जगह अल्पसंख्यक में तब्दील हो जाए। लेकिन हमारे देष के महान संगठन विहिप व बजरंग दल की यह पहल उन्हें अपने मंसूबे पर खरा नहीं उतरने दे रही। ऐसा नहीं है कि मैं हिन्दू हूं तो मैं मजार पर जाकर सर नहीं झुकाता जरूर झुकाता हूं हमारी लड़ाई धर्म से नहीं समाज से है। अगर आप हिन्दू होते हुए भी अपने आपको गद्दार कहलवाना पसंद करते हो तो इससे बड़ा हिन्दुस्तान का दुःख क्या होगा कि एक हिन्दू अपने आपको गद्दार कहलवाना पसंद करता है न कि हिन्दू।

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