- हृदेश अग्रवाल

ईद की सभी को हार्दिक शुभकामनायें

ठाकरे मराठी भाषा की वकालात करते थे और उत्तर भारतीयों का अपमान अब कहां गया? मराठियों का सम्मान करने वाली मनसे पार्टी के एक कार्यकर्ता ने कोर्ट के बाहर हिन्दी भाषा में बोर्ड लगाया और मराठी छोड़ हिन्दी को अपनाया। जिसमें दिखाया गया है कि आतंकवाद के खिलाफ मनसे प्रमुख राज वकीलों से कह रहे हैं कि हमें गर्व है कि हम इस देष के नागरिक हैं और हमें आतंकवाद के खिलाफ एक जुट होकर लड़ना चाहिए, तो राज ठाकरे जी क्या आपकी पार्टी एक आतंकवादी पार्टी से कम है? जो खुलेआम मुंबई में उत्तर भारतीयों पर अपना मोर्चा खोले हुए है। क्या आप नहीं मानते कि आपके इस रवैये से लोगों का मुंबई शहर में घूमना मुष्किल हो गया है? उत्तर भारतीय
शहर में घूमने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं हमें मनसे कार्यकर्ताओं की मार न खाना पड़े। इस पर यही कहूंगा कि मराठी व गैर मराठी के मसले को भूल आप यह क्यों नहीं सोचते कि हम सब इस प्यारे भारत देष के नागरिक हैं जहां पर सभी भाषा-भाषियों व समाज के लोगों का अधिकार है। अगर आप भी यही सोचें कि महाराष्ट्र पर सिर्फ मराठों का ही अधिकार नहीं बल्कि समूचे देषवासियों का अधिकार है तो फिर देखिए यह आतंकवाद एक चुटकी में खत्म हो जाएगा। आतंकवादी संगठन या आतंकवादी भारत की तरफ निगाह उठाने की जुर्रत तक नहीं करेगा। आतंकवाद ने अगर भारत पर आंख उठाई तो समूचे भारतीय लोग आतंकवादियों का वही हश्र करेंगे जो आजादी के समय अंग्रेजों का हुआ था, क्योंकि भारत एक परिवार है और इसमें रहने वाला हर नागरिक इस परिवार का सदस्य है। झगड़े तो हर घर में होते हैं लेकिन झगड़कर आपस में लड़ते नहीं, बल्कि एक जुट होकर ही रहते है। अगर हम भाषावाद या जातिवाद के विवादों को भूल जाएं और सिर्फ यही याद रखें कि हम सब पहले हिन्दुस्तानी हैं, और कोई नहीं। तो फिर देखो पाकिस्तान भी हमसे आंख मिलाने में कतराएगा।
क होती है तब उसे देखने लड़के वाले आते हैं तो लड़की को देख पसंद आने पर लड़के के माता-पिता शादी के लिए हां करते हैं और लड़की के माता-पिता को यह दिलासा देते हैं कि हमें सिर्फ लड़की चाहिए दहेज नहीं क्योंकि हम दहेज नहीं मांगते और हमारे घर में बहू को बहू नहीं बल्कि बेटी की तरह लाड़-प्यार से रखते हैं। यह बात सुन लड़की के माता-पिता की खुषी का ठिकाना ही नहीं रहता इसी बीच लड़के वाले बोलते हैं कि हमें तो दहेज में कुछ नहीं चाहिए बस बारातियों के स्वागत में कोई कसर नहीं रहना चाहिए। इस पर लड़की के माता-पिता कहते हैं कि बारातियों के स्वागत में कोई कसर नहीं रहेगी जिससे आपको कोई षिकायत का मौका मिले। तो तुरंत ही लड़के वाले अपना एक और दांव फैकते हैं कि वैसे तो हमें दहेज में कुछ नहीं चाहिए लेकिन आप अपनी बेटी को तो खाली हाथ विदा नहीं करेंगे आप हमें गलत मत समझिए वैसे तो आप इतने समझदार
हैं ही हमारे कहने का क्या मतलब है।ससुराल में जब बेटी जाए तो सास-ससुर के रूप में माता-पिता मिले और ननद व देवर के रूप में बहन व भाई। लेकिन जब लड़की ससुराल पहुंचती है तो उसका बड़ा आदर सत्कार होता है और बहू उन्हें लक्ष्मी दिखती है, जैसे ही बहू की शादी को 15 दिन या महिना भर होता है ससुराल वाले अपना रंग दिखाना चालू कर देते हैं उसे लक्ष्मी की बजाए मनहूस दिखती है जब ससुराल वाले देखते हैं कि हमारा समधियों ने तो दहेज के नाम पर कुछ भी नहीं दिया सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी को खाली हाथ पहुंचा दिया फिर वह दहेज मांगने के लिए कोई न कोई बहाना बनाते हैं और दहेज न मिलने पर उसे या तो घर से धक्के मार कर घर से निकाल देते हैं या फिर बेटी जैसी लगने वाली बहू को इतना परेषान किया जाता है कि उसके मां-बाप को अपनी बेटी की इस हालत पर तरस आए और कम से कम बेटी की यह हालत न हो दहेज तो दे ही देंगे। दहेज मिला तो ठीक नहीं तो बहू को ससुराल वाले एक नौकरानी की तरह बर्ताव कर बात-बात में उसे उसके मां-बाप के बारे में जली-कटी सुनाते हैं और कहते हैैं कि भिखारी कहीं के कहां तो कहते थे कि आपको हमारी तरफ से कोई षिकायत का मोका नहीं मिलेगा, षिकायत तो दूर हमें तो उल्टा उनकी बेटी को पालना पड़ रहा है। हरामखोर, मनहूस कुतिया मर क्यों नहीं जाती जैसे अभद्र शब्द का इस्तेमाल करने लगते हैं।ससुराल वालों को जैसे ही मौका मिलता है वह लक्ष्मी जैसी लगने वाली बहू को मारना, पीटना भी चाहू कर देते हैं सारा काम कराने के बाद भील अगर कोई गलती हो जाए तो उसे भूखे रहने की सजा देते हैं और ताने मारते हैं कि तेरे मां-बाप के यहां यही सीख कर आई है तू। हे भगवान इस लड़की ने तो हमारे खानदान की नाक कटा दी। और अंत में बहू को बेटी का दर्जा देने वाले उसी बहू को तेल डालकर जिंदा जला देते हैं। लेकिन वही ससुराल वाले यह भूल जाते हैं कि वो अगर किसी और की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला रहे हैं और कल कोई उनकी बेटी के साथ यही करे तो कहते हैं कि दहेज के लिए हमारी बेटी को जिंदा जला डाला।बंधन सात जन्मों का के धारावाहिक में दिखाने वाली घटना कोई कालपनिक घटना नहीं बल्कि हमारे देष के ज्यादातर राज्य के छोटे-बड़े शहरों में होने वाली यह आम घटना है।कहने को सरकार कहती है कि यह पहले वाला वक्त नहीं जहां महिलाओं को सिर्फ चूल्हा-चैका के अलावा कोई औरे काम करने की इजाजत नहीं थी आज के वक्त में हर क्षेत्र में पुरूष जितना आगे हैं उनसे कहीं आगे महिलाएं भी अपना नाम रोषन कर रहीं हैं। आज लड़के-लड़की में कोई फर्क शेष नहीं है। लेकिनप आज भी दहेज के लिए लड़कियों को ही क्यों जलाया जा रहा है। इस दहेज की आग से इन लड़कियों को बचाने के लिए सरकार को कोई सख्त कानून बनाने के साथ-साथ कठोर कदम भी उठाने चाहिए। जिससे की किसी भी मां-बाप के कलेजे के टुकड़े को कोई उनके सामने जला के न मार सके।
हुए खुलासे में यह बात सामने आई है कि भारत में कट्टर हिन्दू संगठन के रूप में काम कर रहे बजरंग दल भी बम बनाने लगा है और इससे आतंकवादी संगठन सिमी, इंडीयन मुजाहिद्दीन (ईएम) की तरह ही यह भी आतंकवादी संगठन बनने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।बजरंग दल के इस रवैये पर विष्व हिन्दू परिषद और भारतीय जनता पार्टी भी बिल्कुल मौन हैं इस पर कार्यवाही नहीं कर रही हैं।उड़ीसा व कर्नाटक में हुए चर्चों पर हमले में धर्म के नाम पर बजरंग दल ने साम्प्रदायिक हमले किए हैं जो कि हिन्दू के नाम की दुहाई देने वाले बजरंग भी तो एक आतंकवादी संगठन के रूप में काम कर रहा है अगर बजरंग दल एक धार्मिक व हिन्दुत्ववादी संगठन है
तो सिमी भी कोई आतंकवादी संगठन नहीं है। अगर सिमी पर प्रतिबंध जरूरी है तो बजरंग दल पर भी प्रतिबंध जरूरी है।कर्नाटक में हुए हमले की निंदा करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मो. शफी कुरैषी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने को कहा क्योंकि हमारे देष को बजरंग दल से बहुत बड़ा खतरा है।वहीं उत्तर प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी केन्द्र सरकार से बात कर कहा है कि बजरंग दल पर जितनी जल्दी हो सके प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि बजरंग दल हिन्दुत्तव के नाम पर साम्प्रदायिक दंगे करवा रहा है जिससे हमारे देष के नागरिकों को खतरा है क्योंकि बजरंग दल भी बम बनाने लगा है।वहीं बेंगलूरू में इन दोनों के समर्थन में श्रीश्री रविषंकर जी महाराज ने हिंसा पर खेद जताते हुए कहा कि हर जगह धर्म के नाम पर साम्प्रदायिक दंगे कराना हिन्दू धर्म के खिलाफ है। उन्होंने केन्द्रीय जांच कमेटी को गठित कर जांच करने के लिए कहा है।बजरंग दल को आज हिन्दुस्तान में अपनी पहचान बनाने में कोई ज्यादा समय नहीं लगा है इसकी स्थापना उत्तर प्रदेष में विष्व हिन्दू परिषद ने एक युवा शाखा के रूप में की थी जिसे 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वस में ज्यादा पहचान मिली। तब बजरंग दल ने अपनी कई नई शाखाओं की स्थापना की जिसमें प्रमुख हैं दुर्गा वाहिनी, गौरक्षा समिति।भास्कर के डीबी स्टार में बताया गया है कि बजरंग दल ने कई जगह बम बनाए जिसमें उनके नेताओं व कार्यकर्ताओं की जान गई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा था कि आतंकवाद से निपटने के पोटा तो नहीं बल्कि पोटा से भी ज्यादा सख्त कानून बनाया जाएगा और उसका डिपार्टमेंट भी अलग होगा लेकिन जुमा-जुमा 4 दिन हुए प्रधानमंत्री के इस बयान को आज गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि कोई नए कानून की आवश्यकता नहीं बल्कि यही कानून सही है सिर्फ कुछ मशीनरी की आवश्यकता है क्योंकि महाराष्ट्र में तो मकोका कानून है फिर भी वहां पर बम
ब्लास्ट नहीं हुए क्या इसलिए नए कानून से कुछ नहीं होता कानून जो है वही सही है। अब एक बात समझ से परे है कि शिवराज पाटिल जी नए कानून के खिलाफ क्यों हैं क्या वह नहीं चाहते कि देष में अमन शांति बनी रहे, या फिर शिवराज पाटिल जी इसलिए इस नए कानून के खिलाफ हैं क्योंकि उनको डर है कहीं उनके हाथों में एक नए मंत्रालय की बागडोर न दी जाकर किसी और को इस मंत्रालय का मंत्री बनाया जाए जो बाकई इस मंत्रालय के साथ-साथ देश का भला कर सके आतंकवादियों को साफ करके, इससे कहीं यह साबित न हो जाए कि माननीय पाटिल साहब के हाथ में जो गृह मंत्रालय है उसकी हालत काफी लचर है। अगर ऐसा नहीं है तो उन्हें फिर किस बात की चिंता उन्हें तो बल्कि खुश होना चाहिए कि हमारे नए देश में आतंकवादियों से निपटने के लिए एक नया व सख्त कानून बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की है। कहीं ऐसा तो नहीं शिवराज पाटिल जी कहीं ये बताना चाह रहे हों कि वह देश व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी दोनों से ऊपर हैं।
करके ही दम लेता है उसी प्रकार आतंकवाद दीमक की तरह हमारे भारत देष से चिपक गया है जो लगता है कि पूरी तरह खत्म करके ही दम लेगा क्योंकि दिल्ली में हुए आतंकवादी हमलों में दिल्ली पुलिस ने जो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जो छापामारी की तो पता चला कि इन आतंकवादियों के दोनों फाइनेंसर पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं और इन्हीं को लेकर दिल्ली व उप्र पुलिस सहित पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वो जितना सोच रहे थे ये सब कुछ उस सबसे बढ़ कर है। दिल्ली में बम धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के आति
फ का जब ईमेल चेक किया गया तो एक और खुलासा सामने आया जिसमें लिखा था कि देष में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए गौरी व गजनबी नामक आतंकी संगठन जिसमें करीब 20-30 कार्यकर्ता शामिल होंगे वो मौके की तलाष में हैं। दैनिक भास्कर में छपी ख़बर गुजरात के वड़ोदरा में हुए हमले में छापे की कार्यवाही को अंजाम देते वक्त विस्फोटक सामान के साथ क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को एक भड़काऊ सीडी बरामद हुई और क्राइम ब्रांच के अनुसार यह सीडी उस्मान अगरबत्तीवाला नामक आरोपी के ठिकाने से वरामद हुई जिसको देखने के बाद तो मानो पुलिस के पांव के नीचे से जमीन ही खिसक गई हो, उस सीडी में कुछ और नहीं भड़काऊ भाषण व आतंकवादी गतिविधियां शामिल थीं कि अगर कोई भी इसका विरोध करता है तो मौत के घाट उतार दिया जाएगा। ये किसी और ने नहीं बल्कि अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन, अयमान अल जवाहिरी और तालिबानी नेता मुल्ला उमर के भड़काऊ भाषण व आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने की बात थी। जिसमें साफ-साफ लिखा है कि अल्लाह को न मानने वाला और जो मुसलमान हमारे काम में अड़चने पैदा करेगें उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा, और कोई भी हिन्दू या मुसलमान अगर विरोध करता है तो उसका सर कलम कर दिया जाएगा। जो मुसलमान कहते हैं कि कोई भी आतंकी हिंसा होती है और सबसे पहले शक की बुनियाद पर हम मुसलमानों को गिरफ्तार किया जाता है तो क्या करें जितने भी आतंकी संगठन हैं वह सब भी तो मुस्लिम आतंकी संगठनों से तालमेल रखते हैं और कहते हैं कि अल्लाह को न मानने वालों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। इन आतंकी हमलों से पाकिस्तान तो बहुत खुश होगा क्योंकि यही पाकिस्तान तो है जो दुनिया भर के आतंकियों को पनाह देता है और भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाकर उसकी पीठ में छुरा भौंकता हैं और कहता यही है कि हमें बहुत खेद है कि भारत पर आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान के जो मंसूबे हैं कि मैं भारत पर बार-बार आतंकी हमला करवाकर किसी तरह से कष्मीर को ले लूंगा तो पाक यह भूल जाए कि कष्मीर तो मिलने नहीं देंगे। भारत-पाक की जब कभी भी शांति वार्ता के लिए पहल की जाती है तो शांति वार्ता में आतंकियों को छोड़ पहले कश्मीर मुद्दा उठ जाता है। यह तो वही बात हुई मखमल में लपेटकर जूते से मार लिया, अगर किसी ने कहा कि मार क्यों रहे हो तो कह दिया कि मारा कहां से साफ किया है।